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तीन तलाख बंद होने के बाद के हालत

तीन तलाख को जैसे ही उच्चतम न्यायालय ने अवैध घोषित  किया है एक विशेष धर्म के लोगो के अंदर अब बेचैनी सी होने लगी है।  आइये इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में जानते हैं। १-फतवा जज के ऊपर - आज के बाद कोई भी जज काला  कोट नहीं पहनेंगे वो रंग हमारी महिलाओ का है।  उच्चतम न्यायालय के आदेश को न माना जाये ये धर्म विरोधी है।  जज आज के बाद केवल टिंडे की सब्जी खाएंगे।  जज अबसे तीन बार नहाएंगे  अब कुछ ऐसे ही उल जलूल फतवे सुनने को मिलेंगे।  २-घर का माहौल - पति बेगम से अजी आज खाने में क्या बनेगा तो बेगम भी कहेंगी जो मन हो बना लो अब तो मोदी हमारे साथ हैं।  शौहर  के तलाख  तलाख  तलाख  तलाख  ३ बार बोलने पे अब कोई रोने के बजाय खुब  हॅसेगा। क्या मस्त जोक मारा है।  अब तो बेगम कितनी भी शॉपिंग करे शोहर बेचारा देखता ही रहेगा ये क्या हुआ कैसे हुआ।  सब जगह का माहौल - चचा - क्या हुआ  भतीजा - क्या बताये बेगम ने आज खाना नहीं दिया।  चचा- तो दे दो तलाख तुम अबतक कैसे रुके हो हमने तो तुम्हारी ती...

कब तक सैनिक मरते रहेंगें मोदी जी

आज पूरा देश ये पूछ रहा है कि मोदी जी सैनिक कबतक मरते रहेंगे । आज फिर ये खबर सुनने को मिल रही है कि हमारे दो सैनिको को मार कर उनके साथ बरबरता की गई । पहली सरकार पे तो हमे भी विस्वा...

योगी आदित्यनाथ -एक परिचय (सन्यासी से मुख्यमंत्री)

योगी आदित्यनाथ अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। इस खबर से देश के बहुत से लोग खुशियाँ मना रहे हैं और कुछ लोग कुछ करने के लायक ही नही रहे। योगी आदित्यनाथ हमेशा हिदुत्व के पछधर रहे हैं। और इस बार बीजेपी के स्टार प्रचारक भी रहे हैं। उनके बारे में कुछ ऐसी बाते बताने जा रहा हूँ जो शायद आपको ना पता हो। योगी का अ सली नाम  अजय सिंह नेगी है।  १९९४ में  दीक्षांत समारोह के बाद अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बने। इनका जन्म स्थान श्रीनगर उत्तराखंड है।  आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं।  उनके बाद मंदिर के महंत यही हैं।  आदित्यनाथ ने math से स्नातक किया है।  १९९८ से गोरखपुर में चुनाव जीत रहे हैं।  ७ सितम्बर २००८ को हमले में ये बाल बाल बचे थे और ये हमला इतना बड़ा था की हमलावरों ने १०० वाहनों को घेर लिया था।  १९९३ में आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर गए थे।  योगी अपने पिता की जगह  महन्त अवैद्यनाथ जी का नाम लिखते हैं।  आदित्यनाथ को बैडमिंटन और तैरना पसंद है।  योगी की लंबाई ५'४" है...

मोदी का मुख्यमंत्री प्रेम -भक्त दूर ही रहें तो अच्छा है

देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश का प्रधानमंत्री एक राज्य का मुख्यमंत्री बनने की होड़ में लगा हुआ है। ऐसा किसी  और देश नही हमारे  देश भारत में हो रहा हैं। जहा प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी देश का कामकाज छोड़कर यूपी में चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ऐसा वो खुद कहते हैं की अखिलेश मायावती मोदी से डरते हैं। अब ये तो डरेंगे ही क्योकि जब प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री की दौड़ में जो है। मुझे आजतक ये समझ नहीं आया की भारतीय जनता पार्टी में मोदी के अलावा दूसरा नेता क्यों नही है शायद इसलिए क्योकि मोदी के अलावा कोई दूसरा नेता हो ही ना और भा. ज. पा. को लग रहा है की ये नेता चल गया चलने दो और कोई आया तो कही कुछ गलत ना हो जाये। अब ऐसी डरपोक पार्टी के बाकी नेता तो किसी काम के ही नही होंगे। अगर मोदी मुख्यमंत्री बनते हैं तो कुछ ठीक नही तो उत्तर प्रदेश का बंटाधार समझिए।                अब जरा मुख्यमंत्री मोदी और अखिलेश मुख्यमंत्री पे नजर डाल ले। मोदी ने १० साल के गुजरात के कार्यकाल में केवल हाईवे के ही काम कराये जो की पैसे केंद्र से आते हैं। अब...

Social Trade क्या पैसा वापस मिलेगा और कितना मिलेगा

एक २६ साल के B.Tech  स्नातक (Graduate ) ने एक ४० साल के M.B.A  परास्नातक के साथ मिलकर ६ लाख लोगो से ३७०० करोड़ रुपयो की ठगी की। और इसमें उनका साथ दिया बड़ी बड़ी  कंपनियों में काम करने वाले बुद्धिजीवी लोगो ने। मैं ऐसा इसलिए कहा क्योकि जो लोग भी शुरूआत में ऐसी कंपनी से जुड़ते है उन्हें पता होता है की कंपनी भागने वाली है और  अगर वो अभी जुड़ते है तो उनके पैसे कई गुना हो जायेंगे। क्योकि ऐसी कंपनी लाख लोगों से कम में नही मानती हैं। तबतक तो शुरुवात वाले लोगो के पैसे कई गुना  हो जाते हैं।            अब ये बताइये Speak Asia जो की आज से कई साल पहले आयी थी वो जब २२०० करोड़ लेकर गयी तो क्या ये कंपनी उससे कम में रुकेगी। और इस कंपनी का साथ भी बड़े बड़े पदों पे काम करने वाले लोगो ने दिया। मैं बाकी लोगो की बात इसलिए कर रहा हूँ क्योकि शुरुवात के ६०%  लोगो से अगर आप पूछोगे की कंपनी कैसी है तो वो यही कहते हैं की कंपनी भागेगी ये तो पक्का है पर तबतक वो बहुत पैसे काम लेंगें। फसते तो वो लोग है जो बाद में जुड़ते हैं या जो उनपर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमा...

जनता तो आरंभ से ही विरोध में थी। आप बाद में आये।

जनता तो आरंभ से ही  विरोध में थी। आप बाद में आये। आपको ये शीर्षक कुछ अटपटा सा लग रहा होगा। परन्तु  ये सत्य है और ये बात आज मुझे मेरी मित्र से बात करते हुए ही आभास  हुआ। अब मेरे कुछ मित्र जिन्हें भक्त भी कहते है वो ये कहते हैं की साठ साल तक किसी ने कुछ नही बोला , बोला था भाई और बहुत बोला था।  आप उस समय सुन नही रहे थे या आपको पता नही चला। और कुछ युवराज के भक्त कहते है जो भी किया हमने किया। अब मै ज्यादा  बात न करते हुए सीधे मुद्दे पे आता हूँ। जब देश आजाद हुआ तब कांग्रेस के प्रेसीडेंट के लिए १५ में से १२ प्रदेश कांग्रेस ने सरदार वल्लभ भाई का नाम दिया था ३ ने किसी का नाम नही दिया था। परन्तु गाँधी जी ने नेहरू की तरफदारी की थी और अपनी इच्छा  जता चुके थे फिर भी किसी ने नेहरू का नाम नही दिया। अंतिम दिन जे. बी. कृपलानी ने नेहरू को नामित किया।   वल्लभ भाई पटेल ने अपना नाम वापस लेकर नेहरू को प्रधानमंत्री बनने दिया क्योकि वो ७१ वर्ष के हो गए थे और कार्यालय में बैठने के बजाए देश की सेवा करना चाहते थे ।  नेहरू ५६ वर्ष के थे तो वो कुछ अधिक समय तक सेवा कर ...