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जावेद अख्तर ,गीता फोगाट और गुलमेहर

जावेद अख्तर के लिए देश के नायक केवल फिल्मो में काम करने वाले हैं उनके लिए देश के खिलाडी और देश के लिए मरने वालो की कोई इज़्ज़त नही। जब उन्होंने लछ्य जैसी फिल्मो में डायलॉग लिखे तो उनके दिमाग में केवल पैसा था या कुछ और। क्या जावेद जी को ये पता है की देश के लिए मैडल लाने में कितनी मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए मैडल लाना कॉलेज में जाकर डिग्री करने से बहुत कठीन काम है। कॉलेज में बहुत से लोग एक साथ सफल होते हैं और मैडल केवल और केवल ३ लोगो को ही मिलता है और सोना केवल १ को ही मिलता है। क्या ये सब जावेद जी को कोई बताएगा। किसी को अनपढ़ कहने से पहले अपनी डिग्री बताये और ये भी बताये की देश के बाहर कितने लोगो से आजतक मुकाबला कर चुके हैं या कभी हिम्मत नहीं दिखाई?????                   गुलमेहर जी हम आपके साथ हैं मगर युद्ध का विरोध करना ठीक है पर आपको ये भी पता होना चाहिए की पाकिस्तान कैसा देश है और वो हमारे देश में अशांति फ़ैलाने के लिए क्या क्या करता है।  आपकी बात ऐसी थी की जैसे आपको आपकी पढ़ाई ने नही परीछा ने पास किया। अगर एग्जाम नही होते तो आप पास...

मोदी का मुख्यमंत्री प्रेम -भक्त दूर ही रहें तो अच्छा है

देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश का प्रधानमंत्री एक राज्य का मुख्यमंत्री बनने की होड़ में लगा हुआ है। ऐसा किसी  और देश नही हमारे  देश भारत में हो रहा हैं। जहा प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी देश का कामकाज छोड़कर यूपी में चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ऐसा वो खुद कहते हैं की अखिलेश मायावती मोदी से डरते हैं। अब ये तो डरेंगे ही क्योकि जब प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री की दौड़ में जो है। मुझे आजतक ये समझ नहीं आया की भारतीय जनता पार्टी में मोदी के अलावा दूसरा नेता क्यों नही है शायद इसलिए क्योकि मोदी के अलावा कोई दूसरा नेता हो ही ना और भा. ज. पा. को लग रहा है की ये नेता चल गया चलने दो और कोई आया तो कही कुछ गलत ना हो जाये। अब ऐसी डरपोक पार्टी के बाकी नेता तो किसी काम के ही नही होंगे। अगर मोदी मुख्यमंत्री बनते हैं तो कुछ ठीक नही तो उत्तर प्रदेश का बंटाधार समझिए।                अब जरा मुख्यमंत्री मोदी और अखिलेश मुख्यमंत्री पे नजर डाल ले। मोदी ने १० साल के गुजरात के कार्यकाल में केवल हाईवे के ही काम कराये जो की पैसे केंद्र से आते हैं। अब...

जनता तो आरंभ से ही विरोध में थी। आप बाद में आये।

जनता तो आरंभ से ही  विरोध में थी। आप बाद में आये। आपको ये शीर्षक कुछ अटपटा सा लग रहा होगा। परन्तु  ये सत्य है और ये बात आज मुझे मेरी मित्र से बात करते हुए ही आभास  हुआ। अब मेरे कुछ मित्र जिन्हें भक्त भी कहते है वो ये कहते हैं की साठ साल तक किसी ने कुछ नही बोला , बोला था भाई और बहुत बोला था।  आप उस समय सुन नही रहे थे या आपको पता नही चला। और कुछ युवराज के भक्त कहते है जो भी किया हमने किया। अब मै ज्यादा  बात न करते हुए सीधे मुद्दे पे आता हूँ। जब देश आजाद हुआ तब कांग्रेस के प्रेसीडेंट के लिए १५ में से १२ प्रदेश कांग्रेस ने सरदार वल्लभ भाई का नाम दिया था ३ ने किसी का नाम नही दिया था। परन्तु गाँधी जी ने नेहरू की तरफदारी की थी और अपनी इच्छा  जता चुके थे फिर भी किसी ने नेहरू का नाम नही दिया। अंतिम दिन जे. बी. कृपलानी ने नेहरू को नामित किया।   वल्लभ भाई पटेल ने अपना नाम वापस लेकर नेहरू को प्रधानमंत्री बनने दिया क्योकि वो ७१ वर्ष के हो गए थे और कार्यालय में बैठने के बजाए देश की सेवा करना चाहते थे ।  नेहरू ५६ वर्ष के थे तो वो कुछ अधिक समय तक सेवा कर ...