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मोदी का मुख्यमंत्री प्रेम -भक्त दूर ही रहें तो अच्छा है

देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश का प्रधानमंत्री एक राज्य का मुख्यमंत्री बनने की होड़ में लगा हुआ है। ऐसा किसी  और देश नही हमारे  देश भारत में हो रहा हैं। जहा प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी देश का कामकाज छोड़कर यूपी में चुनाव प्रचार कर रहे हैं और ऐसा वो खुद कहते हैं की अखिलेश मायावती मोदी से डरते हैं। अब ये तो डरेंगे ही क्योकि जब प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री की दौड़ में जो है। मुझे आजतक ये समझ नहीं आया की भारतीय जनता पार्टी में मोदी के अलावा दूसरा नेता क्यों नही है शायद इसलिए क्योकि मोदी के अलावा कोई दूसरा नेता हो ही ना और भा. ज. पा. को लग रहा है की ये नेता चल गया चलने दो और कोई आया तो कही कुछ गलत ना हो जाये। अब ऐसी डरपोक पार्टी के बाकी नेता तो किसी काम के ही नही होंगे। अगर मोदी मुख्यमंत्री बनते हैं तो कुछ ठीक नही तो उत्तर प्रदेश का बंटाधार समझिए।

               अब जरा मुख्यमंत्री मोदी और अखिलेश मुख्यमंत्री पे नजर डाल ले। मोदी ने १० साल के गुजरात के कार्यकाल में केवल हाईवे के ही काम कराये जो की पैसे केंद्र से आते हैं। अब अखिलेश ने भी यही काम किया परंतु अखिलेश ने देश  का सबसे अच्छा हाईवे बनाया जिसपर हवाईजहाज भी उतर सकता है। इतने बड़े राज्य की स्टेट वे को भी अच्छा कर दिया। मोदी मेट्रो एक शहर में भी मेट्रो ट्रेन नहीं ला पाए और उत्तर प्रदेश में नॉएडा और लखनऊ में मेट्रो चल रही है। जहा तक व्यापार की बात है जो लोग व्यापार समझते है जानते होंगे की गुजरात पत्तन के पास है तो व्यापार के लिए अनुकूल है तो वहाँ व्यापार लाना कितना आसान है। यूपी के हालात अलग है फिर भी यहाँ इन ५ सालो में बहुत ज्यादा निवेश आया है और आएगा।
       
             मैं इस बात से भी हैरान हूँ की भक्त और भाषण प्रेमी भी नही जानते की अगर भा. ज. पा. जीती तो मुख्यमंत्री मोदी बनेंगे तो क्या वो प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देंगे या साथ साथ काम करेंगे। अगर इस्तीफा देते हैं तो प्रधानमंत्री कौन होगा। या वो रीता बहुगुणा की तरह राहुल गाँधी को भा. ज. पा. में बुलाकर प्रधानमंत्री ना बना दे। ऐसा लगता तो नही है की होगा। तो डर इस बात का है की कही कोई अपराधी जो की सभी पार्टियों में पाए जाते हैं उसे ना बना दे मुख्यमंत्री। भक्तो को भक्त इसीलिए कहा जाता है क्योकि उनको केवल मोदी दिख रहे हैं और उनके पीछे कोई कैसा है क्या है इससे मतलब नहीं है।

मोदी भक्त मुझे मोदी भक्त काम केजरीवाल के स्कूल से स्नातक ज्यादा लगते हैं। और कई बार तो वो केजरीवाल तक को पछाड़ देते हैं। भाई मुझे तो उम्मीद थी की राज्य के चुनाव में राज्य के स्तर की बाते होंगी राज्य के नेता होंगे परंतु यहाँ तो केंद्र और राज्य की लड़ाई होती दिख रही है। प्रचार का ऐसा जमाना आ गया है की काम से ज्यादा प्रचार हो रहा है। अगर ये पोस्ट किसी केजरीवाल स्कूल से पढ़े हुए मोदी भक्त गलती से पढ़ ले तो दुसरो की बुराई करने से पहले अपने भगवान के कुछ काम जो की सच में उनके हो बता पाये तो बताएं और ये तो जरूर बताए की मोदी मुख्यमंत्री क्यों बनना चाहते हैं।


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