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जावेद अख्तर ,गीता फोगाट और गुलमेहर

जावेद अख्तर के लिए देश के नायक केवल फिल्मो में काम करने वाले हैं उनके लिए देश के खिलाडी और देश के लिए मरने वालो की कोई इज़्ज़त नही। जब उन्होंने लछ्य जैसी फिल्मो में डायलॉग लिखे तो उनके दिमाग में केवल पैसा था या कुछ और। क्या जावेद जी को ये पता है की देश के लिए मैडल लाने में कितनी मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए मैडल लाना कॉलेज में जाकर डिग्री करने से बहुत कठीन काम है। कॉलेज में बहुत से लोग एक साथ सफल होते हैं और मैडल केवल और केवल ३ लोगो को ही मिलता है और सोना केवल १ को ही मिलता है। क्या ये सब जावेद जी को कोई बताएगा। किसी को अनपढ़ कहने से पहले अपनी डिग्री बताये और ये भी बताये की देश के बाहर कितने लोगो से आजतक मुकाबला कर चुके हैं या कभी हिम्मत नहीं दिखाई?????

                 गुलमेहर जी हम आपके साथ हैं मगर युद्ध का विरोध करना ठीक है पर आपको ये भी पता होना चाहिए की पाकिस्तान कैसा देश है और वो हमारे देश में अशांति फ़ैलाने के लिए क्या क्या करता है।  आपकी बात ऐसी थी की जैसे आपको आपकी पढ़ाई ने नही परीछा ने पास किया। अगर एग्जाम नही होते तो आप पास ही नही होती। और जब अपने कोई बात कही तो उसपर आप खुद बात क्यों नही करती किसी और को अपना वक्ता बनाकर सामने कर दिया। आखिर इसकी जरुरत कैसे आ गयी आप युद्ध के विरोध में हैं हर एक भारतीय युद्ध के विरोध में हैं कोई युद्ध नही चाहता है। पर इसका ये मतलब तो नहीं की हम किसी और की तारीफ और अपने देश की बुराई करें। और मैं उन विद्यार्थियों से भी पुछना चाहूंगा अगर आपको इनसे कोई परेशानी थी तो आप अपनी बात रखते ये मार पीट और अपना स्कूल कॉलेज छोड़कर ये सड़को पे उतरना हमारे देश की संस्कृती को शोभा नही देता। जब इतनी पढ़ाई करने के बाद भी सड़को पे उतरना पड़े तो फिर उससे अच्छा तो अनपढ़ ही रहें।

गीता जी हमें आपके ऊपर गर्व है आपने देश को मैडल दिलाया और देश का सर ऊँचा किया है आपको किसी फ़िल्मी लेखक के सर्टिफिकेट की कोई जरुरत नहीं है। देश को आपके ऊपर हमेशा गर्व रहेगा।

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